kanwan yatra
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

मुंह में राम, बगल में छुरियां आखिर क्यों ?

मुंह में राम, बगल में छुरियां आखिर क्यों ? मेरे तमाम पाठक मश्विरा देते हैं कि मुझे अब भाजपा और मोदी जी को बख्श देना चाहिए ,क्योंकि ये दोनों मुझे बीमार कर सकते है।  ऐसे मित्रों को मैं अक्सर कहता हूँ कि  भाजपा और मोदी जी ने मेरी भैंस...
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